छूटें दस साल में जुड़ती जाती हैं
उपहार कर उपहार में से लागू छूट घटाकर बची रकम पर प्रगतिशील तालिका लगाता है: दस करोड़ तक 10%, पचास करोड़ तक 20%, सौ करोड़ तक 30%, तीन सौ करोड़ तक 40% और उससे ऊपर 50%।
छूटें रिश्ते पर निर्भर हैं और दस साल में जुड़ती जाती हैं: जीवनसाथी के लिए 60 करोड़, वयस्क संतान के लिए 5 करोड़, नाबालिग के लिए 2 करोड़, बाकी रिश्तेदारों के लिए 1 करोड़ और बिना रिश्ते वालों के लिए कुछ नहीं।
वयस्क संतान को दस करोड़ देने पर आधार पाँच करोड़ और कर पचास लाख बनता है। अगर उन्हीं दस सालों में तीन करोड़ पहले ही दिए जा चुके हैं तो छूट सिर्फ दो करोड़ बचती है और आधार बढ़कर आठ करोड़ हो जाता है।
वे उपहार जिनका लोगों को पता नहीं चलता
हर उपहार पर छूट फिर से शुरू नहीं होती। उपहार दस साल में जुड़ते हैं, इसलिए उन्हें थोड़े समय में बाँटने से कोई बचत नहीं होती; दशकों में बाँटने से होती है।
विवाह और संतान-जन्म वाली छूट अक्सर छूट जाती है: विवाह पंजीकरण या जन्म के दो साल के भीतर सीधे पूर्वज से मिली दस करोड़ की अतिरिक्त छूट, कुल मिलाकर पंद्रह करोड़ तक कर-मुक्त।
बच्चे के नाम पैसा जमा करना या शेयर खरीदना उपहार है। जीवन-यापन और शिक्षा का खर्च कर योग्य नहीं है, पर खर्च करने की जगह बचाया गया पैसा कर योग्य है।